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शनिवार, 31 अक्तूबर 2009


"शाहजंहा के दरबार में तरही मुशायरे की महफिल जमी हुयी थी ......तुकबंदी के साथ सवाल जवाब का दौर चल रहा था ..... !

एक शायर ने शेर अर्ज़ किया -

काफिर है वो दुनिया में, जो बन्दे नहीं इस्लाम के !


इसी महफिल मै उस काल के प्रसिद्ध विद्वान् जग्गनाथ पंडित को यह शेर नागवार गुजरा उन्होंने तुंरत समस्या पूर्ति की -

लाम के मानीन्द है , गेसू मेरे घनश्याम के !

काफिर है वो दुनिया मै जो बन्दे नहीं इस 'लाम' के !!

(लाम - उर्दू भाषा का अक्षर है जिसकी बनावट घुंघराली है !)
अच्छे चरित्र की असाधारण प्रतिभा से भी कही ज्यादा प्रशंशा होनी चाहिए ! अधिकांश प्रतिभा किसी हद तक इश्वर प्रदत्त होती है ! अच्छा चरित्र दिया नहीं जाता है , उसे खुद टुकडा टुकडा कर जोड़ते है विचार , चुनाव, हिम्मत और दृढ निश्चय से !







देशभक्त के चरण स्पर्श से कारागार अपने को स्वर्ग समझ लेता है , इन्द्रासन उसे देखकर काप उठता है , देवता नंदन कानन से उसपर पुष्प वृष्टि कर अपने को धन्य मानते है ...., कल कल करती हुई सुर-सरिता और तांडव नृत्य में लीन रुद्र उसका जय जयकार करते है .........

 
 
 
 
 
 
 
तुमने दिया देश को जीवन, देश तुम्हे क्या देगा ?? अपनी आग तेज रखने को नाम तुम्हारा लेगा ......





" जीवन क्या है ?? "

" What is Life ? "

रात के अँधेरे में चोरो ने फुसफुसाहट की - " जीवन हाथ की सफाई व चोरी का दूसरा नाम है!"


माँ के आँचल से लिपटे नन्हे बालक ने अंगडाई लेते हुए कहा -"जीवन माँ के प्यार का दूसरा नाम है!"


मखमली गद्दों पर बैठे सेठजी बोले - "जीवन ऐश्वर्य और आराम है!"


रणक्षेत्र में विजयी सेनिक ने कहा - "जीवन शत्रु पर विजय पाने को कहते है!"


धुप में तपते परिश्रमी मजदूर ने कहा -"कठिन परिश्रम द्वारा उदर पूर्ति करना ही जीवन है!"


तभी चिकित्सालय में लेटे रोगी ने कहा -"जीवन गम व उदासी का दूसरा नाम है!"


कक्षा में बैठा छात्र चिल्लाकर कहता है - "परीक्षा में सफल होना ही जीवन है!"


तभी वन में समाधी से उठते हुए महात्मा शांत स्वर में बोले - "आत्म ज्ञान करना ही सच्चा जीवन है !"


और उसी क्षण मै चिल्ल्ला उठा - "यह कुछ भी नहीं जीवन ... ! जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाकर आदर्श स्थापित कर देना ही जीवन है ! और उनसे घबराकर कायरता से पीछे हटना ही मृत्यू है...!"









" दुसरो को छाया देने वाला दरख्त जब खुद नंगा हो जाता है, उसमे कोपले उगने की सम्भावनाये समाप्त हो जाती है , तब दांतदार आरी की बेरहम धार कमजोर तने के आढे-तिरछे टुकड़े कर डालती है ! तीखी चिलचिलाती धुप उसकी बची खुची नमी को सोख लेती है , और धुप में ऐठी काली बदशक्ल लकडियाँ जलाने के काम आ सकने की उपयोगिता सिद्ध करने के लिए मजबूर कर दी जाती है !!!! "



क्या कोई बता सकता है बच्चें के अंगो पर खिलने वाली मधुर कोमल ताजगी इतने दिनों तक कहा छिपी रही ??? हाँ जब माँ युवती कन्या थी , तब उसके कोमल मूक ह्रदय में प्यार के रहस्य के रूप में थी !!!!!

क्या कोई बता सकता है कि निन्द्रावस्था में बच्चे के होठों पर तरंगित मुस्कान का जन्म कहा हुआ था ??? हा ऐसा माना जाता है कि जहा अर्धचंद्र की पीली युवती किरण ने अदृश्य होते शरद ऋतु के बादलो के एक कोर को छुआ वही ओस -स्नाता भोर के सपनो में प्रथम बार बच्चे की होठों की मुस्कान का जन्म हुआ !!!!!!

जैसे हमारे विचार होते है ,ठीक वैसा ही हम बोलते है ,और जैसा हम बोलते है वैसा ही हम काम करते है । लगातार जैसा हम करते रहते है वैसी हमारी आदत बनती जाती है,यही हमारी आदते हमारे स्वभाव को बनाती है.हमारे स्वभाव से हमारे संस्कार बनते है ,यही संस्कार पीढी दर पीढी हस्तांतरित होते रहते जिससे परम्पराए बनती है .यही परम्पराए तो हमारी श्रेष्ठ सांस्कृतिक धरोहर होती है जिस पर हम गर्व करते है.इसीलिए कहा गया है अच्छे विचारो और अच्छी सोच बनाने के लिए श्रेष्ठ जनों की संगत करनी चाहिए ,अच्छी पुस्तके पढ़नी चाहिए.

अपने विचारो पर नज़र रखो , वे शब्द बन जाते है! शब्दों पर नज़र रखो वे कर्म बन जाते है! कार्यो पर नज़र रखो , वे आदत बन जाते है !आदतों पर नज़र रखो , वे चरित्र बन जाती है ! चरित्र पर नज़र रखो , वह तुम्हारी नियति बन जाती है !!!!!!